सरकार के तमाम प्रयासों के दावों के बावजूद चना में तेजी जारी है। मौजूदा समय में चना 12 हजार रुपए प्रत क्विंटल के स्तर को भी पार कर गया है। चने के इस कदर बढ़ते दामों में सरकार के प्रयास सवालों के घेरे में आ गए हैं। सिर्फ इंपोर्ट पर ही टकटकी लगाए बैठा सरकारी अमला देश के भीतर के हालातों को समझने में नाकाम साबित हो रहा है।
दो साल पहले चना एमएसपी से भी नीचे बिक रहा था। लेकिन, बीते सालों में चना की पैदावार एकाएक गिरने इसके दामों में तेजी आना शुरू हो गई।
पिछले साल चने की पैदावार में लगभग 40 फीसदी से भी ज्यादा गिरावट आई यह केवल 77 लाख टन के आंकड़े को ही छू पाया। इस तरह 2800 रुपए से 3000 रुपए प्रति क्विंटल बिकने वाला चना कुछ महीनों में ही 11000 के आंकड़ों को भी छूकर आ गया। ऐसे में सरकार ने इसको वायदा बाहर से बाहर करने का निर्णय लिया, जिस पर दाम नीचे आना शुरू हो गए। सितंबर के शुरूआती सप्ताह में दाम 8500-8700 रुपए प्रति क्विंटल तक आ गए। लगातार इंपोर्ट के समझौते भी किए जा रहे हैं।
दो साल पहले चना एमएसपी से भी नीचे बिक रहा था। लेकिन, बीते सालों में चना की पैदावार एकाएक गिरने इसके दामों में तेजी आना शुरू हो गई।पिछले साल चने की पैदावार में लगभग 40 फीसदी से भी ज्यादा गिरावट आई यह केवल 77 लाख टन के आंकड़े को ही छू पाया। इस तरह 2800 रुपए से 3000 रुपए प्रति क्विंटल बिकने वाला चना कुछ महीनों में ही 11000 के आंकड़ों को भी छूकर आ गया। ऐसे में सरकार ने इसको वायदा बाहर से बाहर करने का निर्णय लिया, जिस पर दाम नीचे आना शुरू हो गए। सितंबर के शुरूआती सप्ताह में दाम 8500-8700 रुपए प्रति क्विंटल तक आ गए। लगातार इंपोर्ट के समझौते भी किए जा रहे हैं।
20 दिनों में 50 फीसदी बढ़े चने के दाम
सितंबर के अंतिम सप्ताह में 8500 रुपए के स्तर से
चने की कीमतों में तेजी का दौर शुरू हो गया। हालात ये बने कि इसे लगभग 50 फीसदी बढ़ने में
महज 20 दिनों का ही वक्त लगा और फिर से ये 3 महीने पुराने स्तर
12 हजार रुपए प्रति क्विंटल के आसपास आ गया। दिल्ली के व्यापारी
विनोद सिंघल का कहना है कि चना की सप्लाई बेहद कम है। लिहाजा दामों में तेजी आ
रही है। वहीं, अगर चना दाल की बात करें तो इसके दाम 14 हजार रुपए प्रति
क्विंटल तक पहुंच रहे हैं।
नाकाफी सरकार के प्रयास
चने की कीमतों को काबू करने के लिए
सरकार के मौजूदा प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। पहले से ऑस्ट्रेलिया से समझौते
के तहत नवंबर में ही माल भारत आ सकता है। ऐसे में 90 हजार और आयात के समझौते की सिर्फ बात
कहना समझ से परे है। जबकि, इस समय सिर्फ ऑस्ट्रेलिया से ही चना की आवक हो सकती है। वहीं, अब सरकार ने स्टॉक
का चने को एनसीडीएक्स के माध्यम से बेचने की बात कही है। बता दें कि अभी इसमें
भी वक्त लग सकता है। बीज की समस्या को हल करने के लिए सरकार ने 5000 टन चना को बीज
भंडारों को वितरित करने की घोषणा की है।
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